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स्कूल से मेरी नफरत

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#स्कूल से मेरी नफरत --01       यही अगस्त का महीना था , मैं 8th क्लास में था , छोटी दी 10th में , मैं ,छोटी दी और शालू(मेरे क्लास की साथ ही साथ मेरे घर के बगल की) तीनो स्कूल जा रहे थे। मंगलवार का दिन था ,बारिश बहुत ज्यादा हो रही थी।                           मंगलवार का दिन इसलिए मुझे याद है क्योंकि सिर्फ इसी दिन जाते हुए मेरे कपड़े साफ होते थे सिर्फ जाते हुए । आते हुए नही । घर से स्कूल मुश्किल से 1km की दूरी पर होगी । बारिश हुई थी जमकर हुई थी रात से ही हो रही थी , मैं खुश था आज स्कूल नही जाना पड़ेगा , और जब स्कूल का समय आया बारिश छूट गयी। जैसे जैसे बारिश छूट रही थी मेरा मुँह उतर रहा था ,कुछ देर बाद बारिश बिल्कुल छूट गयी और मेरा मुँह प्रकीर्ति के सामने हारे हुए किसान की तरह हो गया था                        मेरी माँ, ना जाने उसे क्या मजा आता था मुझे स्कूल भेजते हुए। कितनी दफा तो मुझे बारिश में भीगते हुए भेजा था ,आज तो बारिश भी छूट गयी थी ,म...

फ़िल्म रिव्यू:-मिशन मंगल

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    फ़िल्म रिव्यू:-मिशन मंगल                             विज्ञान और भगवान     मैं आपको पहले ही बता दूं। मैं अक्षय कुमार को बहुत      ज्यादा ,थोड़ा और ज्यादा ही समझिये पसन्द करता हूँ।     इतना कि पहले दिन ,और पहला शो ही देखता हूँ  ।     बचपन से जब से स्कूल से बंक मारकर फिल्में देखना      शुर किया हूं तब से,                              अब बात फ़िल्म की ,इस वक्त मैं        अक्षय कुमार को पसन्द नही करता ,थोड़ा भी नही         ,अब मैं उनके कार्य का शैली और उसमें उनका                कितना योगदान रहा बस इस बात पर बात करने वाला      हूं।        फ़िल्म को बहुत ही अच्छे ढंग से लिखा गया है ,वैसा ही जैसा लोगो को पसन्द आये , शुरुआत विफलता से और ...
#super30 सचमुच , लंबी छलांग लगाने वाली मूवी है ।            मैं पूरे फ़िल्म के एक सीन में जाकर उलझ गया हूँ। "जब ह्रितिक (आनंद sir) कहते है कि सरस्वती पर सब का अधिकार है " तो मुझे बहुत खुशी हुई,परन्तु जब एक अमीर लड़के ने ये कहा कि sir इसमें हमारी क्या गलती है कि हम अमीर है , तो आनंद sir ने जबाब दिया कि तुमने सुबह से कुछ खाया है ? अमीर लड़का कहता है :-हाँ  आनंद sir कहते है :-इन लोगो ने दो दिन से कुछ नही खाया । आनंद sir ने ये तो कह दिया ,पर उस लड़के के सवाल का सही उत्तर मुझे ,मेरे हिसाब से नही मिला ,,           अभी यही पर एक मौका था ,अमीर और गरीब के बच्चों को साथ लाने का, पर उस वक्त उन्होंने नही किया ,प्रतिशोध की भावना में उन्होंने अमीर और गरीब को एक नही होने दिया ,            जब आपको मौका मिला ,आपने नही किया ,तो फिर आपको कोई अधिकार नही है इस समाज को कोसने का, आप चाहते तो सुधार की यह चाभी घुमा सकते थे । पर अमीरों से हुई आपकी नफरत ने , फिर से अमीर और गरीब के बीच खाई बना दी।  अंत मे , ...

हिंदी दिवस

हिन्दी दिवस      #सेमिनार हॉल वैसा ही माहौल जैसा सोचा था ,वक्ता और श्रोता दोनों की कमी , और क्यू ना हो भाई, यह हिन्दी दिवस है कोई फ्रेशर पार्टी थोड़े ही है, जो हम आश्चार्य आँखों से उनकी तरफ देखते ।                                       इसमे सिर्फ छात्रों की विफलता नही थी । जो भी वक्ता थे कोई भी पूर्व तैयारी के साथ नही आये थे । मुझे तो ऐसा महसूस होता था कि हिंदी दिवस ही समय से पूर्व आ टपका हो।         असल मजाक हिंदी का तब बना और शर्म भी उतनी ही आ रही थी  जब हिंदी दिवस के बैनर पर "हिंदी दिवस" ही सिर्फ हिंदी में लिखा था बाकी सारी जानकारी अंग्रेजी में लिखी हुई थी।         मेरा इस पर लिखना किस हद तक सही है यह बात आपलोगो को अंत मे समझ आएगी । क्योंकि आज शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी पाना बन कर रह गया है ,हम में से किसी को भी भाषा से प्रेम नही रह गया है , ना हमे , ना ही शिक्षकों को ,पूरा पाठ्यक्रम को पढ़ाने की फुर्सत तो है ही नही ,बाहरी...