हम देखेंगे अखिल भारतीय कन्वेंशन 1मार्च 2020
हम देखेंगे अखिल भारतीय कन्वेंशन 1मार्च 2020 टीम अँधेरे में क्या लोग गीत गाएँगे? मैं थोड़ी देर तक सोचने लगा कि इसका जबाब क्या दूं। फिर वहीं जबाब देते हैं कि "अँधेरे में लोग अँधेरे के गीत गाएँगे" इसके बाद मैं फिर सोच में पर गया। संजीव sir यह बात कार्यक्रम के शुरू में हुई थी और मुझे कार्यक्रम के समापन में समझ आया। मैं सोचता रहता था कि ये कैसी दो व्यक्ति की सरकार हैं जो सड़को पर बढ़ रही भीड़ को नहीं देख पा रहीं।जब विभिन्न भाषा ,बोली, साहित्य ,कला या अनेक विधा से जुड़े लोगों को एक मंच से हुंकार भरते हुए देखा, तो समझा सबकी समस्या एक जैसी ही हैं। बस वो अपने दुःख दर्द को अलग-अलग भाषा माध्यम से व्यक्त कर रहें हैं। हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू ,कन्नड़, तमिल आदि सभी भाषा ने स्त्री के दबे दर्द को दिखाया। एकता का सूत्र दिया।आजदी का मतलब समझाया,इंकलाब की भावना को जागृत किया। अपनी कला प्रस्तुत करती छात्रा "संघर्ष व्यक्ति को पैना(तेज) बना देता हैं।" वर्तमान तंत्र अपनी कुंठित मानसिकता की वजह से हम भारतीय...