#super30 सचमुच , लंबी छलांग लगाने वाली मूवी है । मैं पूरे फ़िल्म के एक सीन में जाकर उलझ गया हूँ। "जब ह्रितिक (आनंद sir) कहते है कि सरस्वती पर सब का अधिकार है " तो मुझे बहुत खुशी हुई,परन्तु जब एक अमीर लड़के ने ये कहा कि sir इसमें हमारी क्या गलती है कि हम अमीर है , तो आनंद sir ने जबाब दिया कि तुमने सुबह से कुछ खाया है ? अमीर लड़का कहता है :-हाँ आनंद sir कहते है :-इन लोगो ने दो दिन से कुछ नही खाया । आनंद sir ने ये तो कह दिया ,पर उस लड़के के सवाल का सही उत्तर मुझे ,मेरे हिसाब से नही मिला ,, अभी यही पर एक मौका था ,अमीर और गरीब के बच्चों को साथ लाने का, पर उस वक्त उन्होंने नही किया ,प्रतिशोध की भावना में उन्होंने अमीर और गरीब को एक नही होने दिया , जब आपको मौका मिला ,आपने नही किया ,तो फिर आपको कोई अधिकार नही है इस समाज को कोसने का, आप चाहते तो सुधार की यह चाभी घुमा सकते थे । पर अमीरों से हुई आपकी नफरत ने , फिर से अमीर और गरीब के बीच खाई बना दी। अंत मे , ...
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हिंदी दिवस
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हिन्दी दिवस #सेमिनार हॉल वैसा ही माहौल जैसा सोचा था ,वक्ता और श्रोता दोनों की कमी , और क्यू ना हो भाई, यह हिन्दी दिवस है कोई फ्रेशर पार्टी थोड़े ही है, जो हम आश्चार्य आँखों से उनकी तरफ देखते । इसमे सिर्फ छात्रों की विफलता नही थी । जो भी वक्ता थे कोई भी पूर्व तैयारी के साथ नही आये थे । मुझे तो ऐसा महसूस होता था कि हिंदी दिवस ही समय से पूर्व आ टपका हो। असल मजाक हिंदी का तब बना और शर्म भी उतनी ही आ रही थी जब हिंदी दिवस के बैनर पर "हिंदी दिवस" ही सिर्फ हिंदी में लिखा था बाकी सारी जानकारी अंग्रेजी में लिखी हुई थी। मेरा इस पर लिखना किस हद तक सही है यह बात आपलोगो को अंत मे समझ आएगी । क्योंकि आज शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी पाना बन कर रह गया है ,हम में से किसी को भी भाषा से प्रेम नही रह गया है , ना हमे , ना ही शिक्षकों को ,पूरा पाठ्यक्रम को पढ़ाने की फुर्सत तो है ही नही ,बाहरी...