फ़िल्म रिव्यु :- पैरासाइट PARASITE


                 #PARASITE(#पैरासाइट)

पैरासाइट हिन्दी में कहें तो परजीवी, पहली बार यह शब्द 8वीं में सुना और पढ़ा था।पैरासाइट का उदाहरण मैंने अमरबेल और कोयल याद किया था विज्ञान की भाषा में कहें तो पैरासाइट वैसे जीव को कहते हैं जो दूसरे जीव पर निर्भर करता हो,वो अपने होस्ट को प्रत्यक्ष रूप से नुकसान नहीं पहुँचाता बल्कि धीरे धीरे उसके सारे न्यूट्रेन्ट्स ग्रहण कर लेता हैं जिससे होस्ट कमजोर हो जाता हैं ,उसे कोई दूसरी बीमारी हो जाती हैं और वो समाप्त हो जाता हैं।.

दूसरी बार मैंने फ़िल्म दोस्ती में करीना कपूर को अक्षय कुमार को पैरासाइट कहते हुए सुना था।उस वक्त मैं पैरासाइट का मतलब समझ चुका था।
  
PARASITE


#पैरासाइट एक बहुचर्चित कोरियन सिनेमा हैं। सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म का सम्मान भी प्राप्त हुआ। साथ हीं सर्वश्रेष्ठ निर्देशक - मोशन पिक्चर, सर्वश्रेष्ठ पटकथा - मोशन पिक्चर के लिए नामित भी किया गया। इसके डायरेक्टर 'Bong Joon-ho' हैं। जो इस तरह की फिल्में बनाते रहतें हैं। दक्षिण कोरिया तकनीक के मामले में अभी जापान और चीन से भी आगे हैं और वैसे समाज में इस तरह की सिनेमा की उम्मीद की जा सकती हैं।


पैरासाइट में मुख्यतः दो अलग-अलग वर्ग के परिवार को दिखलाया हैं। एक किम परिवार हैं दूसरा पार्क परिवार। फ़िल्म किम परिवार से शुरू होती हैं। किम परिवार का घर बेसमेंट जैसा हैं। सड़क की तरफ रौशन दान हैं जिसमें शीशा लगा हुआ हैं। जहाँ से सूरज की रौशनी आती हैं। किम परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय हैं। खाने के लाले पड़े हैं। फ़ोन में सिग्नल नहीं हैं। दूसरे के फ्री wi fi का इस्तेमाल करते हैं। किसी पिज्जा कम्पनी का पैकिंग बॉक्स बनाने का काम घर पर ही करते हैं। गरीबी से बहुत बुरा हाल रहता हैं। आप यूं समझिए कि उस घर का सबसे ऊँचा स्थान कम्बोडि(शौचालय) रहता हैं। आप इस बात से उस घर की गरीबी का अंदाजा लगा सकते हैं कि जब सड़क पर मच्छर मारने के लिए जहरीले कीटनाशक का छिड़काव करने आये तो किम परिवार ने खिड़की खुली रहने दी जिससे छिड़काव का धुँआ घर में भी आये और सारे मच्छर मर जाये,उस धुंआ की वजह से किम परिवार थोड़ी देर तक खाँसता रह गया था।

दूसरा परिवार हैं पार्क का,जो किम परिवार से बिल्कुल अलग हैं जिसका घर ऊँचे इलाके में हैं।जहाँ बारिश आँखों को सुकून देती हैं।शरीर में रोमांस पैदा करता हैं। खिलखिला धूप चेहरे को चमकीला बना देता हैं। घर आलीशान हैं। सभ्य ,संस्कारी, और रईस। 

दोनों परिवार में कुछ चीजें कॉमन हैं। दोनों परिवार में चार-चार लोग हैं। दोनो परिवार में दो बच्चे और  माता पिता हैं। 

एक दिन जब किम परिवार एक साथ बैठ खा पी रहें हैं थे तभी किम का एक दोस्त आता हैं। वो उनके लिए एक एंटीक चीज भेंट स्वरूप लाता हैं।वो किम की गरीबी को देख किम को एक सलाह देता हैं कि तुम्हारी इंग्लिश अच्छी हैं। तुम ट्यूटर का काम क्यों नही करते हैं। मैं किसी को जानता हूँ। और वो किम को पार्क परिवार के लिए रीकॉमेन्ट  कर देता हैं। इस बीच किम अपनी बहन की मदद से कुछ फर्जी डिग्री बनाकर जॉब के लिए चला जाता हैं। वहाँ वह कुछ तरकीबें अपना कर धीरे धीरे अपने घर के सभी सदस्य को वहाँ पर काम दिलवा देता हैं।

कहानी मोड़ लेती हैं एक दिन जब पार्क परिवार अपने छोटे बेटे के बर्थडे पर बाहर जाती हैं। तो किम परिवार उसके घर को अपना घर समझ मौज मस्ती करते है। उस घर को अपना घर बनाने का ख्याली पुलाव पकाते हैं। कोई इस घर की मालकिन बन बैठती हैं। कोई खुद को राजा कहता हैं। किम के पिता पार्क को अपना समधी तक कह देते हैं। बारिश बहुत हो रही होती हैं। ये सभी एन्जॉय कर रहें होते हैं। तभी बेल बजती हैं। दरवाजे पर पुरानी मेड खड़ी रहती हैं। जो कहती हैं कि जल्दी जल्दी जाने में मैंने बेसमेंट में अपना सामान छोड़ दिया हैं। उसे वापस लेने आए हूँ। यहीं कहानी ट्विस्ट करती हैं। बेसमेंट में उसने अपने पति को छिपायी हुई रहती हैं। वो दौड़ कर उसके पास जाती हैं उसे पीने को कुछ देती हैं। यहाँ के बाद कहानी में एक दूसरे से छिपाना,धमकी देना शुरू होता हैं।

इन सब के बीच पार्क परिवार भाड़ी बारिश के कारण वापस आ जाता हैं। सब छिप जाते हैं। मेड यहाँ भूमिका में आकर सबको निर्देशित करती हैं छिपाती हैं। बारिश बहुत तेज होती हैं। किसी तरह किम अपने परिवार के साथ छिपते छिपाते तेज बारिश में भीगते हुए घर पहुँचता हैं। जहाँ वो अपने घर मे बारिश के पानी को भड़ा हुआ देखता हैं और उदास हो जाता हैं। कम्बोड से गंदगी निकल रही होती हैं। हर चीज पानी मैं तैरती हुई छत को छू रही होती हैं। सबकुछ स्थिर हो जाता हैं। कम्बोडिय पर किम की बहन बैठ सिगरेट पीते हुए राहत की साँस लेती हैं। 

किम परिवार किसी सरकारी रैनबसेरा में रात गुजरते हैं।(जैसे अभी दिहाड़ी मजदूर बेवश हैं दिल्ली में) वे वहीं खाना खाते हैं और कपड़े ढूंढकर पहन लेते हैं। किम परिवार को पार्क परिवार की तरफ से बेटे के बर्थ डे का न्योता दिया जाता हैं। वो सभी वहाँ जाते हैं पर वो वहाँ नहीं होते सबके दिमाग में कल रात की तेज बारिश और पुरनी मेड के साथ क्या हुआ यहीं याद आ रहा था। इधर किम पार्क की बेटी को kiss कर रहा होता हैं। पर उसका ध्यान बेसमेंट में पुरानी मेड पर ही टिका होता हैं। पार्क की बेटी के बार बार पूछने पर भी वो कुछ नही बोलता। और फिर वो बेसमेंट की तरफ चल बढ़ता हैं।

बेसमेंट में जाते ही पुरानी मेड का पति किम पर हमला कर देता हैं। और एक चाकू लेकर पार्टी में हमला कर देता हैं। जहाँ वो किम की बहन की जान ले लेता हैं। यह देख पार्क का बेटा बेहोश हो जाता हैं और वो किम के पिता को गाड़ी की चाभी के लिए कहता हैं।किम के पिता देखते हैं कि उनकी बेटी के सीने में चाकू हैं ,और बेटा घायल हैं पत्नी पुरानी मेड  के पति से लड़ती हुई उसके शरीर मे चाकू मार देती हैं। किम के पिता पूरी तरह  से होपलेस नजर आते हैं। उस बीच पार्क अपने बच्चे की जान बचाने के लिए चाभी मांग रहा होता हैं।किम के पिता उसे चाभी दे देंते हैं। पर वो चाभी पुरानी मेड के पति की लाश के नीचे दब जाता हैं। पार्क उसे हटाता हैं और नाक पर हाथ रखते हुए चाभी उठा लेता हैं। यह किम के पिता देखते हैं। और वो चाकू लेकर पार्क की तरफ बढ़ते हैं और उसके सीने में उतार देते हैं। वो वहीं मर जाता हैं। और किम के पिता गायब हो जाते हैं।

कुछ दिन बाद किम होश में आता हैं और खुद को हॉस्पिटल में डॉक्टर और पुलिस के बीच घिरा पाता हैं। एक ऐसे डॉक्टर के पास जो डॉक्टर नही लग रहा था।  एक ऐसे पुलिस वाले के पास जो पुलिस नही लग रहा था। वो हँसने लगता हैं। वो हँस रहा होता हैं।वो सबकुछ देख सिर्फ हँस रहा होता हैं। और फिर हँसते हँसते वो चुप हो जाता हैं। जब वो अपनी मरी बहन की तस्वीर देखता हैं।और अपने पिता को लापता।

पुलिस किम का पीछा करती हैं कुछ दिनों बाद उसका पीछा छोड़ देती हैं।किम अपने पिता को ढूंढ रहा होता हैं। वो अपने पिता के बारे में अंदाजा लगाता हैं कि उसके पिता भी पुरानी मेड की पति की तरह बेसमेंट में छिपे होंगे और वो सही होता हैं।उसके पिता वहीं होते हैं। वो बल्ब की रोशनी को बंद और चालू करके किम को रोज मेसेज करते थे।डिस दैट ,डिस दैट..........किम खुद से वादा करता हैं कि एक दिन वो बहुत सारा दौलत कमायेगा और उस घर को खरीदेगा,अपने पिता को बेसमेंट से बाहर निकालेगा।

इस फ़िल्म की आखरी लाइन :- ये दिन भी कट जाएंगे  । मुझे वर्तमान से जोड़कर देखेने पर मजबूर कर देती हैं। आज हम सभी किसी बेसमेंट में कैद हैं। खाते हैं,पीते हैं पर अकेले हैं, ठीक किम के पिता के जैसे , पुरानी मेड के पति के जैसे।

रैनबसेरा ,जब किम के घर मे पानी भर जाता हैं तो वो रैनबसेरा में जाते हैं। जैसे दिहाड़ी मजदूर उसमें रहने को विवश हैं। किम के पिता किम से कहते हैं कि "कौन जानता था कि हमारा ये हाल होगा" प्लैन अधूरा रह जाता हैं तो दुख होता हैं।इसलिए कोई प्लैन नही अब जो होगा देखा जाएगा। यह भी वर्तमान जैसा ही मुझे दिखता हैं।हम में से किसी ने नहीं सोचा था कि हमारे साथ कभी ऐसा होगा हम किसी कमड़े में खुद को बंद कर लेंगे ,इतने सारे लोगो की मौत को देखना पड़ेगा।

इस तरह की फिल्मों को बनते रहना चाहिये और सम्मान भी मिलते रहना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूँ कि बॉलीवुड के भी फ़िल्म निर्माता निर्देशक इस तरह की फिल्मों से कुछ सीखेंगे और कुछ नया और अलग करने का प्रयास करेंगे।💐









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